यूँ ही कुछ वक़त पहले
दिल में ख्याल आया -
तुम मेरी हो
बाकियों की तरह
या उनसे कुछ हटकर
तुम मेरी हो
पर
अब दिमाग की सोच में हैं -
क्या तुम मेरी हो?
October 1, 2009
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मन में उबलते बहुत-से अनकहे विचारों में से कुछ, जिन्हें कागज़, कलम और दवात नसीब हुए
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