April 12, 2008

" रकीब या दिलबर "

तेरी झील-सी आँखों में
उतरा हुआ चाँद
मुझसे पूछता है की
तू मेरा रकीब तो नहीं ?

अब तू ही बता
मैं
उस चाँदनी छोडे चाँद को क्या कहूँ
रकीब या दिलबर ?

--- 22th Sep. 2007 को लिखीं । " किसी " ने कहा कि बहुत-सी कवितायें लिखीं हैं तुमने । पर , मुझ पे कोई कविता नही लिखीं । आज लिख दो । वो कहते हैं ना " जब कोई प्यारा प्यार से कहे तो उसकी बात नहीं टालते " । सो, मैंने भी नहीं टाली

No comments: