April 15, 2008

" जिन्दगी या मौत "

जिंदगी ...
क्या हैं ? क्यों हैं? कैसी हैं?
क्या हैं , यह तो मैं नहीं जानता ।
क्यों हैं , यह तो कोई नहीं जानता ।
और रही बात कैसी हैं ,
यह तो सभी जानते हैं ।

यही मौत है ।
क्यों कि,
जिंदगी और मौत
दोनों ही शुरुआत हैं ।
जिंदगी मायावी दुनियाँ की
तो मौत आलौकिक दुनियाँ की ।

कभी - कभी सोचता हूँ
जिंदगी मौत की जन्मदात्री हैं
या
मौत जिंदगी की जन्मदात्री हैं ।
जो भी हो,
पर एक बात तो तय हैं -
दोनों ही इन्तजार बहुत करतीं हैं ।
जिंदगी नौ माह का
तो मौत ...
पूछिये ही मत ...

--- 4th Dec. 1999 को लिखीं ।

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