April 23, 2008

" मेरे सर पे छत हैं "

हडबडा कर
उठ बैठता हूँ
रातों में
चाँद देखने के लिए
पर
आजतक नहीं दिखा
क्योंकि
मेरे सर पे छत हैं
आसमाँ नहीं ...

--- जिनके सर पे छत नहीं उनके दुःख - दर्द को छत वाले यानि मैं क्या जानूँ । 17th Nov. 2003 को लिखीं ।

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